Sunday, 9 October 2016


जिंदगी कहती है  मेरी कहानी
मुठ्ठी भर ख्वाहिशें
 और मीलों से लंबी हैरानी ,
हैरान नहीं मैं की तू साथ क्यों नहीं
तेरे साथ का एहसास क्यों नहीं ,
हैरान हूँ ,
तुझे चाहने के जज़्बात क्यों हैं..
 साये से बचते हैं हमारे
साया बनके घूमते  थे जो
खुशबुओं सी  उड़ती है  फिज़ाओ में
 अब भी वो नज़्म की तरह।
 आज भी घेरते हैं मुझे
तेरी बाहों के घेरे ,
आंसुओं से  अपने,तेरे गालों को भिगोना याद है.
तस्वीर छुपा के रक्खी थी
एक  रोज़ आईने में ,
अब भी साथ है वो
पल्लू की गाँठ  तरह.