Monday, 15 August 2016

शहर

संभाल के जिसे नज़रों में
दूर बहुत निकल आये थे ,
वही रास्ते पूछते हैं ,
अब तेरा शहर कहाँ है?
चौराहे की अठखेलियां ,
नुक्कड़ों के वायदे  ,
मंज़िलों की धूल पूछती है
अब तेरा शहर कहाँ है?